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शीतल माता आरती

जय-जय-जय शीतला माता। सातों बहन शीतला माता।। शरण तिहारे जो भी आयें। कंचन वदन परम यश पाता।। जय-जय-जय शीतला माता....... दिगम्व रा शीतला विकराल स्वयरूपा। गंधर्व आरूद्र वक्र अरू केशा।। हस्त् मर्जनी अमृत कलश धारें। सूप मुकूट माथे पर सुहाता।। जय-जय-जय शीतला माता
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दर्शन पूजन का समय

    • >> आरती प्रात: काल: - 5 बजे दर्शन पूजन आरम्भ अपराहन दो बजे तक।

      >> अपराहन 2 बजे से संध्यां 4 बजे तक पटबंद.

      >> आरती संध्याा कालीन:- संध्याु 4 बजे दर्शन पूजन आरम्भर रात्रि 9.00 बजे तक .

      >> आरती रात्रि 9.00 बजे पट बंद
  • शीतल ब्रत-पूजन विधान

    शुभ दिन – मंगलवार, शनिवार एवं देवीपूजन अन्यि शुभ तिथियॉं शुभ तिथि – चैत्रमास के कृष्णंपक्ष की अष्टंमी आषाढ़ के शुक्लि पक्ष की अष्टतमी एवं विक्रम संवत् के प्रत्येकक माह के शीतला अष्ट मी को अन्य‍ देवी पूजन के शुभ तिथियों को जैसे नवरात्रा इत्याकदि के शुभ तिथियों को। पूजन सामग्री-शुद्धता से एक दिन पूर्व
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    शीतल माता पूजन की शुभ तिथियां

    विक्रम संवत् के चैत्तर मास के शुक्लष पक्ष की सप्तणमी, अष्टरमी एवं नवमी तिथि माघ मास की शुक्लप पक्ष की षष्ठीम, अष्टघमी तथा आषाढ़ मास कृष्णत पक्ष की अष्टीमी तिथि को शीतला माता का विशेष पूजन किया जाता हैं। उत्तरर भारत में इस विशेष पूजन को भक्त जन वसिऔरा पूजन के नाम से जानते हैं।
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    Temple

    शीतला माता पूजन की शुभ तिथियॉं


    विक्रम संवत् के चैत्त मास के शुक्लक पक्ष की सप्त्मी, अष्टरमी एवं नवमी तिथि माघ मास की शुक्लि पक्ष की षष्ठीम, अष्टघमी तथा आषाढ़ मास कृष्णर पक्ष की अष्टीमी तिथि को शीतला माता का विशेष पूजन किया जाता हैं। उत्तीर भारत में इस विशेष पूजन को भक्त जन वसिऔरा पूजन के नाम से जानते हैं। वैसे प्रत्येंक मास के शीतला अष्टनमी को भी शीतला माता का पूजन किया जाता है। जिस परिवार में शीतला माता कुल देवी के रूप में पूजी जाती है उस कुल के मान्यकता अनुसार किसी विशेष तिथि को शीतला माता की विशेष पूजन (पूजाई) किया जाता है। जैसे – सावन और चैत्र की नवमी को अथवा आषाढ़, श्रावण अष्टैमी को या अन्यी मान्या तिथियों को किया जाता है।

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    दर्शन पूजन का समय


    • > आरती प्रात: काल: - 5 बजे दर्शन पूजन आरम्भ अपराहन दो बजे तक ।
    • > अपराहन 2 बजे से संध्याद 4 बजे तक पटबंद |
    • > आरती संध्याम कालीन:- संध्या 4 बजे दर्शन पूजन आरम्भर रात्रि 9.00 बजे तक |
    • > आरती रात्रि 9.00 बजे पट बंद |

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